१. तू नहीं दिल में मगर तेरा निशाँ बाकी है.
२. खुद को इतना भी मत बचाया कर
बारिशें हों तो भीग जाया कर
चाँद लाकर कोई नहीं देगा
अपने चेहरे से जगमगाया कर
दर्द हीरा है, दर्द मोती है
दर्द आँखों से मत बहाया कर
काम ले कुछ हसीन होंठो से
बातों-बातों मे मुस्कुराया कर
धूप मायूस लौट जाती है
छत पे कपड़े सुखाने आया कर
कौन कहता है दिल मिलाने को
कम से कम हाथ तो मिलाया कर ||
बुझ गई आग मोहब्बत की धुआँ बाकी है.
मेरा विशवास मोहब्बत से नहीं उठ सकता.
जब तलक शहर में फूलों की दुकाँ बाकी है.
जिस जगह हमने कलेन्डर में जुदाई लिखी.
एक मुलाक़ात की तारिख वहां बाकी है.
मैं तेरे बेवफा होने से परेशान नहीं.
दिल लगाने को अभी सारा जहान बाकी है.| |
बारिशें हों तो भीग जाया कर
चाँद लाकर कोई नहीं देगा
अपने चेहरे से जगमगाया कर
दर्द हीरा है, दर्द मोती है
दर्द आँखों से मत बहाया कर
काम ले कुछ हसीन होंठो से
बातों-बातों मे मुस्कुराया कर
धूप मायूस लौट जाती है
छत पे कपड़े सुखाने आया कर
कौन कहता है दिल मिलाने को
कम से कम हाथ तो मिलाया कर ||
३. हार हो जाती है जब मान लिया जाता है,
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है ||
और एक झलक में जिस शख्स की चाहत हो जाये ,
उसको परदे में भी पहचान लिया जाता है ||
४. परो को खोल जमाना उड़ान देखता है ,
ज़मीं पर बैठ कर क्या आसमां देखता है ||
मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफाजत कर ,
संभल कर चल तुझे सारा जहाँ देखता है ||
कोई कनीज हो या सहजादी ,
जो इश्क़ करता ही कब खानदान देखता है ||
५. शाम होने को है घर जाते है ,
अब बुलंदी से उतर जाते है ||
ज़िन्दगी मेरे सामने मत आया कर ,
हम तुझे देख कर डर जाते है||
ख्वाब क्या देखे थके हारे लोग ,
ऐसे सोते है की मर जाते है ||